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Article Dated 25th February 2021

सीजीएसटी रूल्स में महत्वपूर्ण संशोधन - नवीनतम जानकारी

सीजीएसटी रूल्स, 2017 में चौहदवे संशोधन द्वारा कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किये गये है। इन संशोधनों के द्वारा जीएसटी कानून में आमूल-चूल परिवर्तन होने की संभावना है। जीएसटी में फर्जी इनवाइसों के चलते इनपुट टैक्स क्रेडिट की जो बड़ी मात्रा में चोरी हो रही है उनको मद्देनजर रखते हुये सरकार ने यह कठोर प्रावधान जीएसटी कानून में लागू किये है। इन संशोधनों की संक्षिप्त जानकारी इस लेख में हमने देने का प्रयास किया है।

रूल 8 में संशोधन

रूल 8 का संशोधन हालांकि अभी लागू नहीं किया गया है लेकिन इसे लागू करने की तारीख सरकार अभी नोटिफाई करेगी। इस रूल 8 में सब-रूल (4ए) को बदला गया है। वर्तमान में 21 अगस्त 2020 से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वालों को आधार का ओथेन्टीकेशन करना होता है। नये नियम के अनुसार यह ओथेन्टीकेशन बायोमैट्रीक आधार पर करना होगा तथा फोटो भी अपलोड करना होगा तथा यदि बिना आधार ओथेन्टीकेशन के रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है तो कोई अन्य वैलिड डाक्यूमेंट द्वारा बायोमेट्रीक एवं फोटोग्राफ द्वारा ओथेन्टीकेशन करना होगा।

इस संशोधन के लागू होने के पश्चात टैक्स कन्सलटेंट्स को अपने ऑफिस में बायोमेट्रीक मशीन लगानी होगी तभी वे अपने क्लाइंट्स को जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सुविधा प्रदान कर सकेंगे। इसके साथ ही जो डाक्यूमेंट्स रजिस्ट्रेशन आवेदन फार्म REG-01 के साथ प्रस्तुत किये जायेंगे उनकी मूल प्रति से सत्यापन भी करना होगा। यह कार्य फेसिलिटेशन सेंटर जो कमिश्नर नोटिफाई करेगा उनमें ही किया जा सकेगा। अब कमिश्नर किन्हे नोटिफाई करते है यह भी देखने वाली बात है।

रूल 9 में संशोधन

रूल 9 में संशोधन तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

रूल 9 के वर्तमान प्रावधान के तहत यदि कोई आवेदनकर्ता आधार ओथेन्टीकेशन के द्वारा रजिस्ट्रेशन लेना चाहता है तो उसे 3 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन जारी कर दिया जाता है। अब इस अवधि को 3 दिन से बढाकर 7 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा बिना आधार ओथेन्टीकेशन के रजिस्ट्रेशन करवाने वाले आवेदकों को उनके कार्य स्थल की जांच कर 30 दिन में रजिस्ट्रेशन नम्बर जारी करने का प्रावधान किया गया है।

रूल 21 में संशोधन

रूल 21 के संशोधन तुरंत प्रभाव से लागू कर दिये गये है। रूल 21 में उन परिस्थितियों के बारे में बताया गया जिनके तहत किसी व्यक्ति को जारी किये गये रजिस्ट्रेशन को निरस्त किया जा सकता है। इनमें पहले 4 परिस्थितियां थी जिनमें तीन नई परिस्थितियों को जोड़ा गया है जो इस प्रकार है-

(e)

यदि कोई व्यक्ति धारा 16 के प्रावधानों का उल्लंघन कर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करता है।

(f)

धारा 37 के तहत प्रस्तुत की जाने वाली रिटर्न GSTR-01 में किसी भी टैक्स अवधि के लिए धारा 39 में प्रस्तुत की जाने वाली रिटर्न GSTR-03B से अधिक आऊटवर्ड सप्लाई की जानकारी प्रस्तुत की हो। यानि यदि GSTR-01 में दिखाई जाने वाली सप्लाई GSTR-03B में दिखाई गई सप्लाई से अधिक होगी तो उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जायेगा।

(g)

यदि कोई व्यक्ति रूल 86B के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जा सकता है । रूल 86B में 50 लाख रु मासिक बिक्री वाले व्यवहारियों केा 1 प्रतिशत टैक्स कैश लेजर से जमा करना होगा तथा 99% राशि क्रेडिट लेजर से जमा करानी होगी।

रूल 21A में संशोधन

रूल 21A रजिस्ट्रेशन को निलम्बित करने से संबंधित है।

1.

इस रूल में यह प्रावधान था कि यदि प्रोपर ऑफिसर को लगता है कि करदाता का रजिस्ट्रेशन धारा 29 या रूल 21 में निरस्त होने योग्य है तो वह उसे सुनवाई का अवसर प्रदान कर उसके रजिस्ट्रेशन को निलम्बित कर सकता था। अब इसमें संशोधन कर सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। अब प्रोपर ऑफिसर बिना सुनवाई का अवसर प्रदान किये रजिस्ट्रेशन को निलम्बित कर सकता है।

2.

यदि करदाता द्वारा प्रस्तुत GSTR-03B तथा GSTR-01 के आऊटवर्ड सप्लाई में कोई अंतर है या GSTR-03B के इनपुट तथा 2बी में दिखाये गये इनपुट क्रेडिट में अंतर है तो प्रोपर ऑफिसर उसके रजिस्ट्रेशन को निलम्बित कर देगा तथा REG-31 में सूचना देकर अंतर की जानकारी करदाता को देगा तथा 30 दिन का समय देकर पूछेगा कि क्यों ना उसका रजिस्ट्रेशन केन्सिल कर दिया जाये।

3.

रजिस्ट्रेशन के निलम्बन के दौरान करदाता को धारा 54 के तहत कोई रिफण्ड जारी नहीं किया जायेगा।

4.

प्रोपर ऑफिसर को रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की कार्यवाही के दौरान यह अधिकार होगा कि वह करदाता के रजिस्ट्रेशन के निलम्बन को वापस ले ले।

               
रूल 36 में संशोधन

रूल 36(4) के वर्तमान प्रावधान के अनुसार जो इनपुट टैक्स क्रेडिट करदाता के सप्लायर्स ने अपने जीएसटीआर-01 द्वारा दिखाया है उसके 110% तक करदाता अपने GSTR-03B में क्लेम कर सकता था। अब इसे 105% कर दिया गया है। यदि कुल खरीद 1.20 लाख रु की है लेकिन यदि सभी सप्लायर्स ने केवल 1 लाख रु की सप्लाई अपने जीएसटीआर-01 में दिखाई है तो करदाता 1.20 लाख रु की जगह 1.05 लाख रु की इनपुट टैक्स क्रेडिट ही क्लेम कर सकेगा।

रूल 59 में संशोधन

रूल 59 आऊटवर्ड सप्लाई की जानकारी प्रस्तुत करने से संबंधित है। इसमें पूर्व में ही 5 सब रूल थे लेकिन लगता है सब रूल (6) की जगह सब रूल(5) इसमें जोडऩा बताया गया है। इस नये सब रूल के कारण अब तीन नये प्रावधान किये गये है-

(i)

यदि किसी करदाता ने लगातार 2 अवधि की GSTR-03B रिटर्न प्रस्तुत नहीं की है उन्हे GSTR-01 रिटर्न प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

(ii)

तिमाही आधार पर GSTR-01 प्रस्तुत करने वाले करदाताओं को GSTR-01 प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जायेगी यदि उन्होने उससे पहले वाले माह की GSTR-03B प्रस्तुत नहीं की है।

(iii)

यदि कोई करदाता जिसे रूल 86बी के तहत 99 प्रतिशत से अधिक राशि क्रेडिट लेजर से चुकाने का अधिकार नहीं है यदि अपनी GSTR-03B रिटर्न प्रस्तुत नहीं करता है तो उसे जीएसटीआर-1 प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

रूल 86B जोडा गया

1 जनवरी 2021 से एक नया रूल 86बी जोड़ा जा रहा है। इस रूल के तहत ऐसे करदाता जिनकी एक माह में कर योग्य सप्लाई 50 लाख रु से अधिक है उन्हे 99 प्रतिशत तक राशि इलैक्ट्रोनिक क्रेडिट लेजर से चुकानी होगी तथा कम से कम 1 प्रतिशत राशि इलेक्ट्रोनिक कैश लेजर से चुकानी होगी। टैक्सेबल सप्लाई में कर मुक्त सप्लाई एवं जीरो रेटेड सप्लाई को शामिल नहीं किया जायेगा। हालांकि यह नियम निम्न श्रेणी के करदाताओं पर लागू नहीं होगा-

(a)

ऐसे करदाता जो पिछले दो वित्तीय वर्ष से कम से कम 1 लाख रु आयकर के रूप में जमा करा रहे है।

(b)

ऐसे करदाता जिन्होंने गत वित्तीय वर्ष में धारा 54(3)(i) के तहत 1 लाख रु से ज्यादा का रिफण्ड प्राप्त किया है।

(c)

ऐसे करदाता जिन्होंने गत वित्तीय वर्ष में धारा 54(3)(ii) के तहत 1 लाख रु से ज्यादा का रिफण्ड प्राप्त किया है।

(d)

यदि करदाता ने इलैक्ट्रोनिक केश लेजर से जो आऊटपुट टैक्स का भुगतान किया है वह उस माह तक प्रत्येक माह को मिलाकर 1 प्रतिशत प्रतिमाह के हिसाब से ज्यादा का किया हो।

(e)

यदि करदाता - सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर इकाई, लोकल अथॉरिटी या वैधानिक बॉडी है।

रूल 138 में संशोधन

वर्तमान में 100 किलोमीटर तक ई-वे बिल 1 दिन के लिए मान्य रहता है तथा इसके पश्चात प्रत्येक 100 किमी के लिए 1 दिन होता है अब प्रत्येक 200 किमी के लिए 1 दिन के लिए मान्य होगा तथा प्रत्येक 200 किमी के लिए 1 दिन अतिरिक्त मिलेगा। यानि अब 200 किमी की यात्रा 1 दिन में पूरी करनी होगी। यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

रूल 138E में संशोधन

रूल 138E में कुछ मामलों में ई-वे बिल को ब्लॉक करने का प्रावधान किया गया है। अब तक दो माह की रिटर्न प्रस्तुत न करने पर ई-वे बिल ब्लोक करने का प्रावधान था। अब दो टैक्स अवधि की रिटर्न पेश न करने पर इसे ब्लॉक करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही यदि रूल 21ए के सब रूल (1), सब रूल(2) या सब रूल (2ए) के तहत रजिस्टे्रशन को निलम्बित किया गया है तो ई-वे बिल का जनरेशन भी ब्लोक कर दिया जायेगा।।

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