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Article Dated 25th February 2021

धारा 73 एवं धारा 74 के तहत कार्यवाही - विशेष जानकारी

सैन्ट्रल गुड्स एण्ड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 की धारा 73 एवं धारा 74 के तहत कर न चुकाने या कम चुकाने या गलत रिफण्ड क्लेम करने या गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने या उसका गलत उपयोग करने पर धारा 73 या धारा 74 के तहत कार्यवाही की जा सकती है। यदि उपरोक्त कार्य धोखाधड़ी द्वारा या जानबुझ कर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके या तथ्यों को छुपाकर नहीं किये गये है केवल गलती से ही हो गये हैं तो कार्यवाही धारा 73 के तहत की जायेगी लेकिन यदि उपरोक्त कार्य धोखाधड़ी द्वारा या जानबूझ कर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके या तथ्यों को छुपाकर किये गये है तो धारा 74 के तहत कार्यवाही की जायेगी।

धारा 73 एवं धारा 74 में कार्यवाही कब की जाती है

धारा 73 एवं धारा 74 में कार्यवाही तब की जाती है जब करदाता जो कर उस पर बनता है उसका भुगतान नहीं करता है या कम भुगतान करता है। इन धाराओं में कार्यवाही के कुछ उदाहरण निम्न प्रकार है-

1.

यदि करदाता जो कम्पोजीशन स्कीम में है कम्पोजीशन स्कीम की शर्तो की पालना सही ढंग से नहीं करता है।

2.

यदि इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर अधिक क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूट कर देता या कानून के प्रावधानों के विरूद्ध क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूटर कर देता है।

3.

यदि स्रोत पर कर काटने वाला व्यक्ति धारा 51 के प्रावधानों की अवहेलना करता है।

4.

यदि करदाता रिटर्न की स्क्रूटनी के संबंध में जारी धारा 61 के नोटिस की पालना नहीं करता है या स्क्रूटनी के बाद उसके द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण सहीं नहीं है।

5.

यदि धारा 64 के तहत जारी निर्धारण आदेश एडिशनल/ज्वाइंट कमिश्नर द्वारा स्वत: ही या आवेदन पेश करने के कारण वापिस ले लिया गया है।

6.

यदि धारा 65 में की गई ऑडिट के बाद कार्यवाही के लिए सिफारिश की गई है। 

7.

यदि धारा 66 में विशेष ऑडिट के बाद कार्यवाही के लिए सिफारिश की गई है।   

8.

यदि धारा 67 में सर्वे के पश्चात कार्यवाही की जानी है।

9.

अन्य कोई कारण जिसमें टैक्स नहीं चुकाया गया है या कम चुकाया गया है या गलत रिफण्ड क्लेम किया गया है या गलत आईटीसी क्लेम की गई है।

धारा 73 एवं धारा 74 के तहत निर्धारण का तरीका

इन दोनों धाराओं के तहत निर्धारण या कार्यवाही का तरीका निम्न प्रकार होगा-

1.

करदाता को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। यदि प्रोपर ऑफिसर व्यक्तिगत उपस्थिति चाहता है तो वह व्यक्तिगत सुनवाई की तिथी, समय तथा स्थान भी नोटिस मे निर्देशित करता है।

2.

यदि नोटिस के जवाब में करदाता द्वारा पेश जवाब से प्रोपर ऑफिसर संतुष्ट हो जाता है तो वह कार्यवाही समाप्त करने के संबंध में आदेश जारी कर सकता है।

3.

यदि नोटिस के जवाब में करदाता द्वारा पेश जवाब से प्रोपर ऑफिसर संतुष्ट नहीं है तो प्रोपर ऑफिसर धारा 73 या धारा 74 के तहत निर्धारण आदेश पारित कर सकता है।

कार्यवाही के दौरान करदाता को एसएमएस या मेल से कब-कब सूचित किया जायेगा

निर्धारण या कार्यवाही के दौरान करदाता को समय-समय पर एसएमएस या मेल के माध्यम से सूचित किया जाता है। यह उसके रजिस्टर्ड मोबाइल एवं रजिस्टर्ड मेल आईडी पर भेजा जाता है। फिजिकल नोटिस नहीं भेजा जाता है। निम्नलिखित स्टेज पर यह सूचना भेजी जाती है-

1.

यदि कारण बताओ नोटिस के जारी होने से पहले ही करदाता स्वयं राशि जमा करा देता है तो उसे GST DRC-04  में इसकी पावती भेजी जाती है।

2.

यदि कारण बताओ नोटिस के जारी होने के 30 दिन के भीतर भुगतान कर दिया जाता है तो GST DRC-05 में कार्यवाही समाप्त होने की सूचना भेजी जाती है।

3.

कारण बताओ नोटिस एवं कारण बताओ नोटिस की समरी GST DRC-01 फार्म में भेजी जाती है।

4.

स्टेटमेंट एवं स्टेटमेंट की समरी GST DRC-02 फार्म में भेजी जाती है।

5.

करदाता द्वारा पेश जवाब की जानकारी GST DRC-06 फार्म में दी जाती है।   

6.

यदि सुनवाई स्थगित की जाती है तो उसकी जानकारी  भेजी जाती है।

7.

यदि कोई याद दिलाने वाला पत्र (reminder) भेजा जाना हो तो उसकी जानकारी भेजी जाती है।

8.

निर्धारण आदेश एवं आदेश की समरी  GST DRC-07 फार्म में या यदि कार्यवाही समाप्त कर दी गई है तो उसकी जानकारी भेजी जाती है।

कारण बताओ नोटिस जारी होने से पहले भुगतान कैसे करें

यदि करदाता कारण बताओ नोटिस जारी होने के पहले स्वत: ही भुगतान कर देता है तो धारा 73 एवं धारा 74 में निर्धारण की कार्यवाही निम्न प्रकार की जायेगी-

1.
निर्धारण अधिकारी करदाता द्वारा भुगतान की गई राशि की जांच करेगा।
2.
यदि निर्धारण अधिकारी भुगतान की गई राशि से संतुष्ट हो जाता है तो ARN या केस आईडी का स्टेटस “acknowledged” के रूप में बदल दिया जायेगा तथा उसके भुगतान को स्वीकार करने की जानकारी ई-मेल या एसएमएस से DRC-04 द्वारा करदाता को भेज दी जायेगी।
3.
यदि कारण बताओ नोटिस जारी होने से पहले जो भुगतान किया गया है वह कम है या भुगतान ही नहीं किया गया है तो निर्धारण अधिकारी करदाता को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। ऐसे मामले में जितनी राशि कम जमा कराई गई है उसका कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा। निर्धारण अधिकारी को यह निर्णय लेना होगा कि वह नोटिस धारा 73 में जारी करें या धारा 74 में।

कारण बताओ नोटिस जारी होने पर भेजे जाने वाले दस्तावेज

यदि निर्धारण अधिकारी धारा 73 या धारा 74 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर रहा है तो वह करदाता को कारण बताओ नोटिस तथा GST DRC-01 में नोटिस की समरी जो कि सिस्टम से जनरेट की जायेगी भेजेगा। जो अवधि कारण बताओ नोटिस में कवर नहीं हो रही है उसके लिए निर्धारण अधिकारी स्टेटमेंट तथा GST DRC-02 में समरी ऑफ स्टेटमेंट भेज सकता है। कारण बताओ नोटिस तथा स्टेटमेंट जारी करने पर यदि करदाता उसका जवाब प्रस्तुत नहीं करता है तो निर्धारण अधिकारी अधिकतम 3 रिमाइन्डर जारी कर सकता है।

सुनवाई के लिए समय लेने के लिए क्या करें

यदि किसी करदाता को धारा 73 या धारा 74 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है तथा एक निर्धारित तिथी पर उपस्थित होने या लिखित जवाब पेश करने के लिए कहा गया है तथा करदाता आगे कुछ समय चाहता है तो वह सुनवाई की तिथी बढ़वाने के लिए समय मांग सकता है। adjournment  के लिए फिजिकली आवेदन प्रस्तुत करना होगा। यदि निर्धारण अधिकारी उसे स्वीकार कर लेता है तो वह जीएसटी पोर्टल पर इसकी जानकारी अपलोड कर देगा तथा करदाता को इसकी जानकारी एसमएस या ई-मेल द्वारा भेज दी जायेगी तथा यह करदाता के डेशबोर्ड पर service> user services> view additioned notices> orders>view>case details>notices पर भी उपलब्ध रहेगा।

यदि निर्धारण अधिकारी करदाता को कारण बताओ नोटिस जारी कर देता है तथा करदाता 30 दिन के भीतर भुगतान नहीं कर पाता है तो करदाता को DRC-06 में नोटिस का जवाब निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करना होता है। यदि करदाता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब पेश करना चाहता है तो DRC-06 में जवाब प्रस्तुत करते समय उसे व्यक्तिगत उपस्थिति की प्रार्थना पर yes को click करना चाहिए।

GST DRC- 06 में जवाब प्रस्तुत करने के बाद की कार्यवाही

एक बार DRC-06 में कारण बताओ नोटिस का जवाब पेश करने के पश्चात पोर्टल पर निम्न कार्यवाही की जाती है-

1.

ARN  / केस स्टेट्स अपडेट हो जाता है तथा वहां “reply furnished, pending for order by tax officer” दिखाई देने लगता है।

2.

reply tab में प्रस्तुत किया गया जवाब अपडेट हो जाता है।

3.

करदाता के पास इसकी पावती एसमएस या ई-मेल के जरीये प्राप्त हो जाती है तथा RFNजनरेट हो जाता है।

4.

DRC-06 जो सिस्टम जनरेट करेगा करदाता के अटैचमेंट के साथ निर्धारण अधिकारी के डैशबोर्ड पर उपलब्ध हो जायेगा।

धारा 73 या धारा 74 के तहत कार्यवाही निरस्त करना

यदि करदाता देय राशि को जमा करा देता है या निर्धारण अधिकारी करदाता के जवाब से संतुष्ट हो जाता है तो वह धारा 73 एवं धारा 74 की कार्यवाही को निरस्त कर सकता है।

धारा 73 के तहत यदि करदाता देय कर का भुगतान मय ब्याज एवं 10 प्रतिशत पेनल्टी के साथ 30 दिन के भीतर कर देता है तथा निर्धारण अधिकारी इस स्वत: किये गये भुगतान से संतुष्ट है तो सभी कार्यवाही समाप्त मान ली जायेगी।

धारा 74 के तहत यदि करदाता देय टैक्स एवं ब्याज का भुगतान 25 प्रतिशत पेनल्टी के साथ 30 दिन के भीतर कर देता है तो उसके विरूद्ध कार्यवाही समाप्त मान ली जायेगी।

निर्धारण आदेश पारित करना

यदि निर्धारण अधिकारी करदाता के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है या करदाता कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेता है तथा ना ही कोई जवाब प्रस्तुत करता है तो निर्धारण अधिकारी धारा 73 या धारा 74 में आदेश पारित कर सकता हे। आदेश जारी होने के पश्चात करदाता को दो डाक्यूमेंट भेजे जाते है। पहला आदेश एवं दूसरा आदेश की समरी जो फार्म GST DRC-07 में जनरेट होती है।

कार्यवाही के दौरान विभिन्न स्टेट्स

जब धारा 73 या धारा 74 की कार्यवाही चल रही होती है तो पोर्टल पर विभिन्न स्टेट्स अपडेट होते रहते है जो समय-समय पर कार्यवाही के अनुसार बदलते रहते है। इन धाराओं में कार्यवाही के दौरान निम्न स्टेट्स आप पोर्टल पर देख सकते है-

1.

जब मामला निर्धारण अधिकारी के समक्ष विचाराधीन होता है - pending for action by tax officer

2.

जब निर्धारण अधिकारी करदाता को नोटिस भेजता है - pending for reply by taxpayer

3.

जब निर्धारण अधिकारी पहले जारी नोटिस का पहला रिमाइन्डर भेजता है - Reminder No.1 issued

4.

जब निर्धारण अधिकारी पहले जारी नोटिस का दूसरा रिमाइन्डर भेजता है - reminder no. 2 issued

5.

जब निर्धारण अधिकारी पहले जारी नोटिस का तीसरा रिमाइन्डर भेजता है -reminder no. 3 issued

6.

जब करदाता नोटिस का जवाब पेश कर देता है तथा वह निर्धारण अधिकारी के पास निर्णय के लिए पेन्डिग होता है -Reply furnished, pending for order by tax officer

7.

जब करदाता निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करता है -  Reply not furnished, pending for order

8.

कार्यवाही को समाप्त करने पर - order for dropping proceedings issued

9.

जब निर्धारण अधिकारी डिमाण्ड का आदेश जारी करता है - Order for creation of demand issued

10.

जब आईडी मास्टर डैटा के अनुसार डिमांड आईडी क्रियेट की जाती है - demand created

“बिना धोखाधड़ी किये या जानबूझकर गलत जानकारी प्रस्तुत किये बिना या तथ्यों को छिपाये बिना टैक्स जमा न कराने या कम टैक्स जमा कराने या गलत रिफण्ड क्लेम करने या गलतइनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने पर धारा 73 के प्रावधान”

(1)

व्यवहारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा

(2)

जिस वित्तीय वर्ष के संबंध में नोटिस जारी  किया जाना है उस वित्तीय वर्ष की वार्षिक रिटर्न भरने की अंतिम तिथी से 3 वर्ष के भीतर संबंधित अधिकारी को आदेश पारित करना होगा तथा इस तिथी से 3 माह पूर्व  उसे नोटिस जारी करना होगा। उदाहरण के लिए वर्ष 2017-18 की वार्षिक रिटर्न प्रस्तुत करने की अंतिम तिथी 5.2.2018 थी इस लिए 4.2.2021 तक आदेश पारित करना आवश्यक है तथा 4.11.2020 तक नोटिस जारी करना आवश्यक है। [धारा 73(2) एवं 73(10)]

(3)

यदि उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी किया  जाता है तो संबंधित अधिकारी को एक  स्टेटमेंट भी व्यवहारी को भेजना होगा जिसमें न चुकाये गये टैक्स या कम चुकाये गये टैक्स या गलत प्राप्त किये गये रिफण्ड या गलत क्लेम किये गये इनपुट टैक्स क्रेडिट की जानकारी व्यवहारी को देनी होगी [धारा 73(3)]

(4)

धारा 73(3) में जारी स्टेटमेंट को भी नोटिस माना जा सकता है। [धारा 73(4)]

(5)

यदि व्यवहारी उपधारा(1) या उपधारा(3) में नोटिस प्राप्त होने से पहले ही अपनी गलती को समझ लेता है तो वह टैक्स की राशि का धारा 50 में  देय ब्याज सहित भुगतान कर सकता है तथा इसकी जानकारी वह संबंधित अधिकारी को दे सकता है। [धारा 73(5)] इस धारा के तहत भुगतान करने पर उसे पेनल्टी से छूट मिल जाती है।

रूल 142(2) के अनुसार यह भुगतान उसे फार्म DRC-03 द्वारा करना होगा तथा संबंधित अधिकारी फार्म DRC-04 जारी कर उसे स्वीकार करेगा।

(6)

यदि व्यवहारी धारा 73(5) के तहत राशि जमा करा देता है तो संबंधित अधिकारी उसे धारा 73(1) या धारा 73(3) में नोटिस या स्टेटमेंट  जारी नहीं करेगा [धारा 73(6)]

(7)

यदि संबंधित अधिकारी को लगता है कि व्यवहारी ने धारा 73(5) के तहत पूरी राशि जमा नहीं कराई है तो वह शेष राशि के लिए धारा 73(1) में नोटिस जारी कर सकता है। [धारा 73(7)]

(8)

यदि व्यवहारी धारा 73(1) या धारा 73(3) में नोटिस या स्टेटेमेंट प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर टैक्स एवं धारा 50 के तहत ब्याज का  भीतर टैक्स एवं धारा 50 के तहत ब्याज का भुगतान कर देता है तो उस पर कोई पेनल्टी नहीं लगाई जायेगी तथा उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त मान लिया जायेगा। [धारा 73(8)]

(9)

यदि व्यवहारी अपना कोई पक्ष रखना चाहता है तो उसकी सुनवाई करके संबंधित अधिकारी टैक्स, ब्याज एवं टैक्स की 10 प्रतिशत या 10  हजार रु जो दोनों में अधिक हो की पेनल्टी लगा सकता है तथा इस संबंध में आदेश पारित कर सकता है। [धारा 73(9)]

(10)

इसके अतिरिक्त यदि कोई व्यवहारी स्व: निर्धारित टैक्स या वसूल किये गये टैक्स को भुगतान की निर्धारित तिथी से 30 दिन तक जमा नहीं कराता है तो उस पर धारा 73(9) के तहत पेनल्टी अलग से आरोपित  की जायेगी। [धारा 73(11)]

“धोखाधड़ी द्वारा या गलत तथ्य पेश कर या तथ्यों को छिपाकर कर चोरी के उद्देश्य से टैक्स न चुकाने या कम चुकाने या गलत रिफण्ड क्लेम करने या गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने पर धारा 74 के प्रावधान”

(1)

व्यवहारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा।

(2)

जिस वित्तीय वर्ष के संबंध में नोटिस जारी किया जाना है उस वित्तीय वर्ष की वार्षिक रिटर्न भरने की  अंतिम तिथी से 5 वर्ष के भीतर संबंधित अधिकारी को आदेश पारित करना होगा तथा इस तिथी से 6 माह पूर्व उसे नोटिस जारी करना होगा। उदाहरण के लिए वर्ष 2017-18 की वार्षिक रिटर्न प्रस्तुत करने की अंतिम तिथी 5.2.2018 थी इस लिए 4.2.2023 तक नोटिस जारी करना आवश्यक है। [धारा 74(2) एवं 74(10)]

(3)

यदि उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी किया जाता है तो संबंधित अधिकारी को एक स्टेटमेंट भी व्यवहारी को भेजना होगा जिसमें न चुकाये गये टैक्स या कम चुकाये गये टैक्स या गलत प्राप्त किये गये रिफण्ड या गलत  क्लेम किये गये इनपुट टैक्स क्रेडिट की जानकारी व्यवहारी को देनी होगी [धारा 74(3)]

(4)

धारा 74(3) में जारी स्टेटमेंट को भी नोटिस माना जा सकता है। [धारा 74(4)]

(5)

यदि व्यवहारी उपधारा(1) या उपधारा(3) में नोटिस प्राप्त होने से पहले ही अपनी गलती को समझ लेता है तो वह टैक्स की राशि का धारा 50 में देय ब्याज एवं टैक्स राशि के 15%  के बराबर पेनल्टी का भुगतान कर सकता है तथा इसकी जानकारी वह संबंधित अधिकारी को दे सकता है। [धारा 74(5)]

रूल 142(2) के अनुसार यह भुगतान उसे फार्म DRC-03 द्वारा करना होगा तथा संबंधित अधिकारी फार्म DRC-04 जारी कर उसे स्वीकार करेगा।

(6)

यदि व्यवहारी धारा 74(5) के तहत राशि जमा करा देता है तो संबंधित अधिकारी धारा 74(1) में उसे नोटिस जारी नहीं करेगा [धारा 74(6)]

(7)

यदि संबंधित अधिकारी को लगता है कि व्यवहारी ने धारा 74(5) के तहत पूरी राशि जमा नहीं कराई है तो वह शेष राशि के लिए धारा 74(1) में नोटिस जारी कर सकता है या [धारा 74(7)]

(8)

यदि व्यवहारी धारा 74(1) में नोटिस प्राप्त होने के  30 दिन के भीतर टैक्स, धारा 50 के तहत ब्याज तथा टैक्स की राशि के 25 प्रतिशत के बराबर पेनल्टी का भुगतान कर देता है तो उसके खिलाफ चल रही सभी कार्यवाही को समाप्त मान लिया जायेगा। [धारा 74(8)]

(9)

यदि व्यवहारी अपना कोई पक्ष रखना चाहता है तो उसकी सुनवाई करके संबंधित अधिकारी उसके द्वारा देय टैक्स, ब्याज एवं पेनल्टी की राशि का निर्धारण कर उसके लिए आदेश जारी कर सकता है [धारा 74(9)]

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